वाल्मीकि रामायण में ब्रह्मतत्त्व: एक शोधपरक अध्ययन
वाल्मीकि रामायण में ब्रह्मतत्त्व: एक शोधपरक अध्ययन
भारतीय संस्कृति एवं दर्शन के विकास में रामायण का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल एक आदर्श चरित्र-कथा नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन, धर्म, नीति, अध्यात्म और ब्रह्मविद्या का भी महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है। रामायण में ब्रह्मतत्त्व प्रत्यक्ष दार्शनिक विवेचन के साथ-साथ कथा, चरित्र और जीवन-मूल्यों के माध्यम से अभिव्यक्त हुआ है। श्रीराम के चरित्र में मानवीय मर्यादा और दिव्य सत्ता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। वे एक ओर आदर्श पुत्र, पति, भाई, मित्र और राजा हैं, तो दूसरी ओर भारतीय धार्मिक परंपरा में परमब्रह्म के अवतार के रूप में प्रतिष्ठित हैं। प्रस्तुत शोध-आलेख में रामायण के संदर्भ में ब्रह्म की अवधारणा, श्रीराम के ब्रह्मस्वरूप, जीव-जगत्-ब्रह्म के संबंध तथा भक्ति, ज्ञान और धर्म के माध्यम से ब्रह्मतत्त्व की अभिव्यक्ति का अध्ययन किया गया है।